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क्या आप कर्ज नहीं चुका पा रहे हैं?? जानिए कर्ज से जुड़े अपने अधिकार

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जाने अपने अधिकार और मुश्किल घड़ी से बचने के उपाय. By Adv Ankit pandey   Loan Default & Borrower's Rights:-   विपिरीत परिस्थितियों की वजह से कर्ज लेने वाले किसी भी व्‍यक्ति के साथ ऐसा हो सकता है कि वह रीपेमेंट वक्‍त पर न कर पाए. कर्ज लेने वालों के भी कुछ अधिकार हैं... लोन लेने की जरूरत किसी को भी पड़ सकती है. होम लोन हो या पर्सनल लोन, जब आप एक बार कर्ज ले लेते हैं तो अवधि की समाप्ति तक आपको ईएमआई देना ही होता है. अगर आप लोन की मासिक किस्‍त यानी EMI चुकाने में असफल रहते हैं तो इसका तत्‍काल नतीजा पेनाल्‍टी के तौर पर नजर आता है. हालांकि, इसके दूरगामी परिणाम भी देखने को मिलते हैं. अगर आपको लगता है कि आप समय पर लोन की राशि चुकाने में सक्षम नहीं हो सकते हैं, तो आप शुरुआत में ही कुछ कदम तैयारियां कर सकते हैं. उदाहरण के तौर पर आप लोन की अवधि बढ़ा सकते हैं, जिससे ईएमआई घट जाती है. इसी तरह, लोन संबंधी शर्तों को निर्धारित करने से पहले अपने फाइनेंशियल स्थिति को व्यवस्थित करना और लोन का पुनर्गठन (Loan Restructuring) करना भी एक बड़ी मदद हो सकती है. आप फाइनेंशियल इमरजेंसी के कारण अस्...

अबॉर्शन कराने की इजाजत, जानें क्या कहता है कानून?

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  भारत में अबॉर्शन को लेकर क्या है कानून? जानें. By Adv. Ankit Pandey  भारत में अबॉर्शन यानी गर्भपात को 'कानूनी मान्यता' है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि इसकी छूट मिल गई है. भारत में अबॉर्शन को लेकर 'मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट' है, जो 1971 से लागू है. इसमें 2021 में माननीय SC द्वारा संशोधन किया गया है सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के संशोधन में कहा है कि भारत में अविवाहित महिलाओं को भी MTP एक्ट के तहत गर्भपात का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने विवाहित और अविवाहित महिलाओं के बीच गर्भपात के अधिकार को मिटाते हुए अपने फैसले मे कहा है कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट से अविवाहित महिलाओं को बाहर करना असंवैधानिक है.सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भारत में अविवाहित महिलाओं को भी MTP एक्ट के तहत गर्भपात का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भारत में सभी महिलाओं को चुनने का अधिकार है. अदालत ने कहा है कि भारत में अविवाहित महिलाओं को भी एमटीपी एक्ट के तहत गर्भपात कराने का अधिकार है.सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का अर्थ ये है कि अब अविवाहित महिलाओं को भी 24 हफ्ते तक गर्भपात क...

What is Legal hier certificate

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A legal heir certificate is a document that lists the legitimate heirs of a deceased person and is issued by the government or other appropriate legal authority.  It is frequently necessary for a number of legal and monetary objectives, including inheriting property, obtaining insurance, getting access to bank accounts, and settling the estate of a deceased person. In order to get a legal heir certificate, one normally needs to apply through the proper government office or entity responsible for issuing such certificates, show proof of their link to the deceased, along with other necessary documents. Each nation and jurisdiction may have different rules and regulations. By Adv. Ankit Pandey  

क्या भारतीय कानून के अनुसार पुलिस आपको गिरफ्तार करने आए और आप ना मिले तो क्या किसी भी घर के सदस्य को उठा के ले जा सकती है

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  नहीं, भारतीय कानून के तहत पुलिस किसी व्यक्ति को बिना किसी सबूत या कानूनी आदेश के उठा कर नहीं ले जा सकती है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अधिकारों का संरक्षण कानूनी होता है, और यह सुनिश्चित करना आवश्यक होता है कि किसी भी गिरफ्तारी का विधिपूर्वक क्रियान्वयन किया जाता है। यदि पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करना चाहती है, तो उन्हें कानूनी दस्तावेजों के साथ विधिपूर्वक गिरफ्तार करना होता है, और यह गिरफ्तारी केवल उस व्यक्ति के खिलाफ लगाये गए आरोपों के आधार पर होती है। घर के अन्य सदस्यों को बिना किसी कानूनी आदेश के उठा कर ले जाना गैरकानूनी होता है। मित्रों, यह जानना बेहद आवश्यक है। पुलिस किसी को भी 24 घंटे से अधिक हिरासत में नहीं रख सकती। भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी की धारा 57 में यह व्यवस्था दी गई है। उसे गिरफतार व्यक्ति को 24 घंटे के अंदर कोर्ट में पेश करना जरूरी है। By Adv. Ankit Pandey 
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  भारत में डिवोर्स divorce की प्रक्रिया क्या है ?? भारत में डिवोर्स  divorce की प्रक्रिया निम्नलिखित तरीके से संपन्न होती है। विवादित विवाह की दर्ज ( #Filing): #lawyer के माध्यम से डिवोर्स की प्रक्रिया की शुरुआत पत्नी या पति द्वारा विवादित विवाह की दर्ज कराना अच्छा माना जाता है। प्रायः, यह उन्हीं न्यायिक अधिकारी के पास होती है जिसका न्यायिक क्षेत्र विवादित विवाह का विचार करने के लिए स्थापित होता है। विवादित विवाह का उद्देश्य निर्धारण (Purpose of #Divorce): विवादित विवाह की दर्ज करने के बाद, विवादित विवाह के पिछले कारणों और विवादों को समझने के लिए न्यायिक अधिकारी द्वारा एक उद्देश्य निर्धारित किया जाता है। भारतीय विवाह अधिनियम, 1955, विवादित विवाह के लिए कुछ विशेष उद्देश्यों को स्वीकार करता है जैसे कि दुर्भाग्यपूर्ण विवाह, भयानक अत्याचार, व्यभिचार, मानसिक बीमारी आदि। बेहतर होगा इसके लिए आप अपने #lawyer को चुन सकते है, और अच्छी सलाह ले सकते हैं। विवादित विवाह के लिए केस दाखिल करना (Filing #Divorce Case): उद्देश्य निर्धारित करने के बाद, पत्नी या पति को उस न्यायिक अधिकारी #lawyer क...
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  विवाहित महिला कोर्ट के माध्यम से भरण पोषण अपने पति से कैसे ले सकती है ? वैवाहिक मामलों कोर्ट में यदि किसी महिला कोर्ट के माध्यम से भरण पोषण (अलीमनी) की आवश्यकता होती है, तो वह अपने केस के लिए lawyer के माध्यम से एक प्राथमिक प्राथमिकारी पत्र  लिख सकती है। इस पत्र में वह अपने केस की विवरण, विवादित विवाह की तारीख, पति के साथ भरण पोषण की आवश्यकता के कारण और इसके साथ ही आर्थिक दस्तावेज़ भी सम्मिलित कर सकती है, जिनसे उसके आर्थिक स्थिति का प्रमाण हो सके (इस संदर्भ में ज्यादा जानकारी आपको आपके #lawyer अच्छे से दे सकते हैं यह आपके व्यक्तिगत स्थिति पर निर्भर करता है ऐसी स्थिति में आप अपने lawyer को ही hire करे। इस प्राथमिक प्राथमिकारी पत्र के साथ, वह एक अधिकारिक वकील  से सलाह लेने और अपने केस को विचार करने के लिए कोर्ट के समक्ष पेश करने के लिए तैयार हो सकती है। वकील आपको उचित निर्देश देगा और उसके अधिकारों की रक्षा करने में मदद करेगा। कृपया ध्यान दें कि विभिन्न देशों और राज्यों में वैवाहिक कानून अलग-अलग होते हैं और भरण पोषण के मामले भी इसमें विभिन्नता हो सकती है। इसलिए, यह जरूरी ...