कर्फ्यू और धारा 144 में अंतर ?
क्या आप जानते है कर्फ्यू और धारा 144 में क्या है अंतर?
By Adv. Ankit Pandey.
कर्फ्यू कुछ विशेष और गंभीर परिस्थितियों में प्रशासन की ओर से लघु करने के निर्णय लिये जाते हैं। इसमें इलाको को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया जाता है। साथ ही सभी लोगों को घरों में रहने के निर्देश दिए जाते हैं। किसी भी व्यक्ति को घर से निकलने की अनुमति नहीं होती।
बिना अनुमति के घर से निकले पर यह होगा परिणाम
यदि कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के घर से बाहर निकलता है, तो स्थानीय पुलिस व्यक्ति को जेल भी भेज सकती है। हालांकि, यदि कोई आपात स्थिति है, तो उस मामले में व्यक्ति को छूट दी जा सकती है।
कर्फ्यू पुलिस द्वारा एक आदेश होती है जिसका प्रयोग विशेष परिस्थितियों में जैसे कि दंगा लूटपाट आगजनी हिंसात्मक और विध्वंसक कार्यों को रोक कर पुनः शांति व्यवस्था स्थापित करने तथा नागरिक की सुरक्षा के नियमित किया जाता है।
यह एक विशेष परिस्थिति में ही लागू किया जाता है और अगर आप कर्फ्यू के दौरान बाहर निकलना होता है तो आपको पुलिस प्रशासन से परमिशन लेनी होती है।
कर्फ्यू के दौरान जरूरतमंद सामग्रियों के लिए सेवाएं खुली होती है।
वहीं धारा 144 कब लागू होता है-
आमतौर पर सुरक्षा की दृष्टिकोण में अगर प्रशासन को संदेह होता है तभी इस धारा को लगाया जाता है।
अक्सर लोकसभा चुनाव विधानसभा चुनाव या पंचायत चुनाव हो या फिर कैसे भी चुनाव हो तब भी 144 धारा लागू की जाती है
या जब किसी भी स्थान या शहर में हिंसा दंगा आगजनी मारपीट या फिर सांप्रदायिक झगड़े रोकने के लिए धारा 144 का इस्तेमाल जिले के डी एम या फिर एसडीएम द्वारा निर्देश पर लागू किया जाता है
इस धारा को हिंसक जगह पर लागू कर शांति व्यवस्था बनाए रखने और शांति बहाल करने के लिए की जाती है।
आपको बता दे की कहीं अगर बवाल हिंसा या दंगा हो जाए तो प्रशासन द्वारा 144 लागू की जाती है, इससे लोगों को एक साथ घूमने फिरने की आजादी नहीं रहती, यानी कि अगर आप एकजुट होकर के कहीं सड़क के किनारे खड़े हैं या किसी भी चौराहे पर 2 से अधिक लोग खड़े हैं तो इसे 144 धारा का उल्लंघन मानते हुए पुलिस आप पर कार्रवाई कर सकती है।
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