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यदि आपके खिलाफ भारत में FIR दर्ज हो गई है, तो क्या करे ??

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  यदि आपके खिलाफ भारत में FIR दर्ज हो गई है, तो क्या करें? By, Adv.Ankit pandey  आपको निम्नलिखित कदम उठाने का विचार कर सकते हैं: 1. **कानूनी सलाह लें**: जल्द से जल्द किसी अनुभवी वकील से संपर्क करें और अपने मामले की जानकारी और सलाह लें। 2. **जाँच का अनुरोध करें**: यदि आपको लगता है कि FIR गलतफहमी या दुरुपयोग के आधार पर दर्ज की गई है, तो आपको जाँच का अनुरोध करना चाहिए। 3. **आपराधिक अभियोग का विरोध करें**: आपको अपने वकील के साथ मिलकर आपराधिक अभियोग का विरोध करना चाहिए और संबंधित सबूतों का समर्थन करना चाहिए। 4. **न्यायालय में आपराधिक मामले की देखरेख करें**: अपने वकील के साथ मिलकर न्यायालय में अपने मामले की देखरेख करें। 5. **कॉपी की अनुरोध करें**: FIR की कॉपी का अनुरोध करें ताकि आप अपने वकील के साथ अच्छी तरह से तैयारी कर सकें। 6. **विवाद सुलझाने का प्रयास करें**: यदि संभव हो, तो आप विवाद को बिना न्यायिक कार्यवाही के सुलझा सकते हैं। 7. **कानूनी प्रक्रिया का पालन करें**: किसी भी कानूनी आदेश का पालन करें और अपने वकील की सलाह पर आमल करें। ध्यान दें कि ये सिफारिशें केवल सामान्य जानकारी क...

पुश्तैनी जमीन का बंटवारा कैसे करें

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पुश्तैनी जमीन का बंटवारा कैसे करें? By Adv. Ankit pandey  संपत्ति दो प्रकार की होती है ,स्वअर्जित संपत्ति और पुश्तैनी संपत्ति। इसमें घर, जमीन, खेती, मूल्यवान वस्तू आदी का अंतर्भाव होता है। पुश्तैनी संपत्ति या फिर उसे हम पैतृक संपत्ति भी कह सकते है जो हमारे पिछले पिढ़ियों से विरासत में मिलती है। तो अब हम जानते है की ‘पुश्तैनी जमीन का बंटवारा कैसे करें’ उसके क्या-क्या नियम होते है और कितने प्रकार से आप ये बटवारा कर सकते है। पैतृक संपत्ति का बंटवारा कैसे करें ? 1) मौखिक बटवारा : इस बटवारे को अंग्रेजी में ओरल बटवारा कहा जाता है। गाव में पहले बुजुर्ग लोग सिर्फ बोलकर अपने वारिसों में जमीन के टुकड़े के बटवारा कर देते थे जिसका कोई कागजी सबूत नहीं होता; आज की तारीख में इस बटवारे की वजह से कोर्ट में केसेस चल रहे है। 2) सहमति बटवारा : इसमें सभी वारिसों की आपसी सहमति से जमीन का बटवारा किया जाता है और तहसील स्तर पे जाकर सहमति से पुश्तैनी जमीन का बटवारा करने का आवेदनपत्र दिया जाता है। फिर तहसीलदार लिखित तौर पे आपका बटवारा करके देंगे आपको उसकी रसीद भी प्राप्त होगी, इसमें आपको नाममात्र शुल्क लगेगा। ...

क्या है कंज्यूमर होने के नाते आपके अधिकार ?

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 क्या है कंज्यूमर होने के नाते आपके अधिकार ? अगर नहीं जानते है तो जान लीजिए आज ही । BY ADV ANKIT PANDEY कंज्यूमर होने के नाते हमें कई अधिकार दिए गए हैं। लेकिन हममें से बहुत कम लोग ही इन अधिकारों के बारे में पूरी तरह से जानते होंगे। ये सभी अधिकार आपको कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत दिए जाते हैं। बता दें कि अपने अधिकारों के बारे में कम जानकारी होने के कारण लोग छोटी-छोटी खरीदारी में अपना नुकसान कर बैठते हैं। कई बार दुकानदार कम जागरूक ग्राहक को देखकर उसका फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। इस कारण आपको अपने कुछ बेसिक कंज्यूमर अधिकारों के बारे में जरूर पता होना चाहिए, ताकि आप एक जागरूक खरीदार बन सकें। आज के आर्टिकल में हम आपको बेसिक कंज्यूमर अधिकारों के बारे में बताएंगे, जिनका इस्तेमाल करके आप एक सतर्क और जागरूक ग्राहक बन सकते हैं। तो आइए जानते हैं कि आखिर हमारे मूल कंज्यूमर राइट्स कौन-कौन से हैं और हमें किस तरह इसका इस्तेमाल करना चाहिए। राइट टू सेफ्टी आपको सुरक्षा का अधिकार देता है। बता दें कि कोई भी दुकानदार अपने ग्राहक को खराब वस्तु नहीं दे सकता है, जिससे भविष्य या वर्तमान में ग्राहक को...

क्या है महिला आरक्षण विधेयक ??

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क्या है महिला आरक्षण विधेयक और क्या लिखा है इस विधेयक में जानिए. By Adv Ankit Pandey  इस विधेयक में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फ़ीसदी आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है. महिला आरक्षण के लिए पेश किया गया विधेयक 128वां संविधान संशोधन विधेयक है. क्या हैं इस विधेयक के प्रावधान? विधेयक में कहा गया है कि लोकसभा, राज्यों की विधानसभाओं और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. इसका मतलब यह हुआ कि लोकसभा की 543 सीटों में से 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. पुदुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित नहीं की गई हैं. जाति आधारित आरक्षण और जेंडर आधारित आरक्षण लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए सीटें आरक्षित हैं. इन आरक्षित सीटों में से एक तिहाई सीटें अब महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी. इस समय तक लोकसभा की 131 सीटें ST और SC लिए आरक्षित हैं. महिला आरक्षण विधेयक के क़ानून बन जाने के बाद इनमें से 43 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित...

कर्फ्यू और धारा 144 में अंतर ?

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क्या आप जानते है कर्फ्यू और धारा 144 में क्या है अंतर? By Adv. Ankit Pandey. कर्फ्यू कुछ विशेष और गंभीर परिस्थितियों में प्रशासन की ओर से  लघु करने के निर्णय लिये जाते हैं। इसमें इलाको को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया जाता है। साथ ही सभी लोगों को घरों में रहने के निर्देश दिए जाते हैं। किसी भी व्यक्ति को घर से निकलने की अनुमति नहीं होती। बिना अनुमति के घर से निकले पर यह होगा परिणाम  यदि कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के घर से बाहर निकलता है, तो स्थानीय पुलिस व्यक्ति को जेल भी भेज सकती है। हालांकि, यदि कोई आपात स्थिति है, तो उस मामले में व्यक्ति को छूट दी जा सकती है। कर्फ्यू पुलिस द्वारा एक आदेश होती है जिसका प्रयोग विशेष परिस्थितियों में जैसे कि दंगा लूटपाट आगजनी हिंसात्मक और विध्वंसक कार्यों को रोक कर पुनः शांति व्यवस्था स्थापित करने तथा नागरिक की सुरक्षा के नियमित किया जाता है। यह एक विशेष परिस्थिति में ही लागू किया जाता है और अगर आप कर्फ्यू के दौरान बाहर निकलना होता है तो आपको पुलिस प्रशासन से परमिशन लेनी होती है। कर्फ्यू के दौरान जरूरतमंद सामग्रियों के लिए सेवाएं खुली हो...

सावधान ! अगर आप इस राज्य में 18 वर्ष के हैं और शराब का सेवन करते हैं तो आपको भी हो सकती है जेल

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सावधान !  अगर आप इस राज्य में 18 वर्ष के हैं और शराब का सेवन करते हैं तो आपको भी हो सकती है जेल . By Adv Ankit Pandey   क्या आपको पता है पूरे भारत में विवाह करने की आयु तो तय है वोट डालने की आयु तो तय है।  लेकिन शराब पीने को ले कर अलग अलग राज्य में एक अलग आयु सीमा तय की गई है. भारत में शराब सेवन करने का अलग-अलग राज्य में अलग आयु कानूनी रूप से तय की गई है आपको बता दें कि गोवा में 18 वर्ष, झारखण्ड  में 21 वर्ष ,जबकि महाराष्ट्र में 25 वर्ष और बिहार और गुजरात में तो बंद ही है. कभी सोचा है कि इस तरह का भेदभाव क्यों?? भारत के संविधान के schedule 7 के अनुसार शराब को राज्य का मामला बताया गया है.मतलब यह है कि राज्य में शराब को लेकर नियम और उससे जुड़े कानून राज्य सरकार के अधीन होगा। आप कितना शराब सेवन कर सकते हैं इसके लिए कोई कानून नहीं तय की गई है.भारत के संविधान में आर्टिकल 47 यह कहता है कि राज्य सरकार अपने राज्य में शराब को लेकर के कोई भी कानून बना सकते हैं। बहुत ही अजीब बात है कि जहां पर वोट डालने के लिए आयु सीमा पूरे भारत में एक रखी गई है , लेकिन शराब को लेकर के हर राज...

कब्जे वाली जमीन को चुटकियों में करवा सकते हो खाली, जानिए क्या है आपके कानूनी अधिकार??

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 कब्जे वाली जमीन को चुटकियों में करवा सकते हो खाली, जानिए क्या है आपके कानूनी अधिकार ? By Adv. Ankit Pandey  सबसे अधिक विवाद संपत्ति को लेकर होते हैं। देश के न्यायालयों में प्रोपर्टी विवाद के लाखों मामले पड़े हुए हैं। रोजाना सैंकड़ों मामला दर्ज होते हैं, जिनमें कई कंपनियों के बंटवारे और अधिग्रहण शामिल हैं। जब किसी दूसरे के पास आपकी संपत्ति है, तो आपके पास उसे खाली करने के लिए कई अधिकार हैं। यदि किसी ने आपकी संपत्ति पर कब्जा कर लिया है और वह इसे खाली नहीं कर रहा है, तो इस खबर में हम आपको इस समस्या का हल बताएंगे। कब्जाधारी से संपत्ति कैसे छुड़वाएँ?  वैसे तो भारत के कानून में हिंसा की अनुमति नहीं है, लेकिन कुछ मामले हैं जहां लोगों को हिंसा करने की अनुमति मिलती है। आप अपनी आत्मरक्षा के लिए हिंसा का सहारा ले सकते हैं, जैसे कि इस कानून के अनुसार, आप अपनी मेहनत से अर्जित की गई जमीन से अवैध कब्जा हटवा सकते हैं। कब्जा हटाने के लिए आप बल का प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन आपको कुछ शर्तें जाननी चाहिए..। इस कानून में स्पष्ट रूप से ये बातें बताई गई हैं,भारतीय संविधान प्रत्येक व्यक्ति को आत...

क्या आपको पता है भारत में वेश्यावृत्ति वैध है:।

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By Adv. Ankit Pandey  क्या भारत में वेश्यावृत्ति लीगल है ?   भारत में जब भी वेश्यावृत्ति की बात की जाती है तो अधिकतर लोग इसे अनैतिक बताकर गलत ठहराने की कोशिश की जाती है तो कुछ लोग इसे संविधान के अनुच्छेद 19 व अनुच्छेद 21 का सहारा लेकर सही ठहराने की कोशिश करते है।   लेकिन अधिकतर लोग जो इसे जीवन यापन के रूप में चुनते है वे किसी ना किसी आर्थिक मजबूरी के कारण ही चुनते हैं।   इसलिये आज हम वेश्यावृत्ति से संबंधित कानून व सुप्रीम कोर्ट के निर्णय क्या है उस पर आपको बताना चाहते है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने Buddhadeb Karmaskar Vs. State of West Bengal & Ors. के मामले को चुनते हुए कुछ दिशा-निर्देश जारी किये हैं।  वेश्यावृत्ति पर माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा और क्या कहा गया है-   यदि कोई सेक्स वर्कर्स अपनी इच्छा से यौन संबंध स्थापित करते है तो सेक्स वर्कर को पुलिस द्वारा गिरफ्तार, दण्डित या छापेमारी के माध्यम से पीड़ित नहीं किया जा सकता है। वेश्यावृत्ति  गैर-कानूनी  नहीं है, लेकिन वेश्यालय ऐसी जगह जहां कोई दबावपूर्ण, लालच देकर वेश्यावृत्ति...

क्या आप कर्ज नहीं चुका पा रहे हैं?? जानिए कर्ज से जुड़े अपने अधिकार

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जाने अपने अधिकार और मुश्किल घड़ी से बचने के उपाय. By Adv Ankit pandey   Loan Default & Borrower's Rights:-   विपिरीत परिस्थितियों की वजह से कर्ज लेने वाले किसी भी व्‍यक्ति के साथ ऐसा हो सकता है कि वह रीपेमेंट वक्‍त पर न कर पाए. कर्ज लेने वालों के भी कुछ अधिकार हैं... लोन लेने की जरूरत किसी को भी पड़ सकती है. होम लोन हो या पर्सनल लोन, जब आप एक बार कर्ज ले लेते हैं तो अवधि की समाप्ति तक आपको ईएमआई देना ही होता है. अगर आप लोन की मासिक किस्‍त यानी EMI चुकाने में असफल रहते हैं तो इसका तत्‍काल नतीजा पेनाल्‍टी के तौर पर नजर आता है. हालांकि, इसके दूरगामी परिणाम भी देखने को मिलते हैं. अगर आपको लगता है कि आप समय पर लोन की राशि चुकाने में सक्षम नहीं हो सकते हैं, तो आप शुरुआत में ही कुछ कदम तैयारियां कर सकते हैं. उदाहरण के तौर पर आप लोन की अवधि बढ़ा सकते हैं, जिससे ईएमआई घट जाती है. इसी तरह, लोन संबंधी शर्तों को निर्धारित करने से पहले अपने फाइनेंशियल स्थिति को व्यवस्थित करना और लोन का पुनर्गठन (Loan Restructuring) करना भी एक बड़ी मदद हो सकती है. आप फाइनेंशियल इमरजेंसी के कारण अस्...

अबॉर्शन कराने की इजाजत, जानें क्या कहता है कानून?

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  भारत में अबॉर्शन को लेकर क्या है कानून? जानें. By Adv. Ankit Pandey  भारत में अबॉर्शन यानी गर्भपात को 'कानूनी मान्यता' है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि इसकी छूट मिल गई है. भारत में अबॉर्शन को लेकर 'मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट' है, जो 1971 से लागू है. इसमें 2021 में माननीय SC द्वारा संशोधन किया गया है सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के संशोधन में कहा है कि भारत में अविवाहित महिलाओं को भी MTP एक्ट के तहत गर्भपात का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने विवाहित और अविवाहित महिलाओं के बीच गर्भपात के अधिकार को मिटाते हुए अपने फैसले मे कहा है कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट से अविवाहित महिलाओं को बाहर करना असंवैधानिक है.सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भारत में अविवाहित महिलाओं को भी MTP एक्ट के तहत गर्भपात का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भारत में सभी महिलाओं को चुनने का अधिकार है. अदालत ने कहा है कि भारत में अविवाहित महिलाओं को भी एमटीपी एक्ट के तहत गर्भपात कराने का अधिकार है.सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का अर्थ ये है कि अब अविवाहित महिलाओं को भी 24 हफ्ते तक गर्भपात क...

What is Legal hier certificate

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A legal heir certificate is a document that lists the legitimate heirs of a deceased person and is issued by the government or other appropriate legal authority.  It is frequently necessary for a number of legal and monetary objectives, including inheriting property, obtaining insurance, getting access to bank accounts, and settling the estate of a deceased person. In order to get a legal heir certificate, one normally needs to apply through the proper government office or entity responsible for issuing such certificates, show proof of their link to the deceased, along with other necessary documents. Each nation and jurisdiction may have different rules and regulations. By Adv. Ankit Pandey  

क्या भारतीय कानून के अनुसार पुलिस आपको गिरफ्तार करने आए और आप ना मिले तो क्या किसी भी घर के सदस्य को उठा के ले जा सकती है

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  नहीं, भारतीय कानून के तहत पुलिस किसी व्यक्ति को बिना किसी सबूत या कानूनी आदेश के उठा कर नहीं ले जा सकती है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अधिकारों का संरक्षण कानूनी होता है, और यह सुनिश्चित करना आवश्यक होता है कि किसी भी गिरफ्तारी का विधिपूर्वक क्रियान्वयन किया जाता है। यदि पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करना चाहती है, तो उन्हें कानूनी दस्तावेजों के साथ विधिपूर्वक गिरफ्तार करना होता है, और यह गिरफ्तारी केवल उस व्यक्ति के खिलाफ लगाये गए आरोपों के आधार पर होती है। घर के अन्य सदस्यों को बिना किसी कानूनी आदेश के उठा कर ले जाना गैरकानूनी होता है। मित्रों, यह जानना बेहद आवश्यक है। पुलिस किसी को भी 24 घंटे से अधिक हिरासत में नहीं रख सकती। भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी की धारा 57 में यह व्यवस्था दी गई है। उसे गिरफतार व्यक्ति को 24 घंटे के अंदर कोर्ट में पेश करना जरूरी है। By Adv. Ankit Pandey 
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  भारत में डिवोर्स divorce की प्रक्रिया क्या है ?? भारत में डिवोर्स  divorce की प्रक्रिया निम्नलिखित तरीके से संपन्न होती है। विवादित विवाह की दर्ज ( #Filing): #lawyer के माध्यम से डिवोर्स की प्रक्रिया की शुरुआत पत्नी या पति द्वारा विवादित विवाह की दर्ज कराना अच्छा माना जाता है। प्रायः, यह उन्हीं न्यायिक अधिकारी के पास होती है जिसका न्यायिक क्षेत्र विवादित विवाह का विचार करने के लिए स्थापित होता है। विवादित विवाह का उद्देश्य निर्धारण (Purpose of #Divorce): विवादित विवाह की दर्ज करने के बाद, विवादित विवाह के पिछले कारणों और विवादों को समझने के लिए न्यायिक अधिकारी द्वारा एक उद्देश्य निर्धारित किया जाता है। भारतीय विवाह अधिनियम, 1955, विवादित विवाह के लिए कुछ विशेष उद्देश्यों को स्वीकार करता है जैसे कि दुर्भाग्यपूर्ण विवाह, भयानक अत्याचार, व्यभिचार, मानसिक बीमारी आदि। बेहतर होगा इसके लिए आप अपने #lawyer को चुन सकते है, और अच्छी सलाह ले सकते हैं। विवादित विवाह के लिए केस दाखिल करना (Filing #Divorce Case): उद्देश्य निर्धारित करने के बाद, पत्नी या पति को उस न्यायिक अधिकारी #lawyer क...
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  विवाहित महिला कोर्ट के माध्यम से भरण पोषण अपने पति से कैसे ले सकती है ? वैवाहिक मामलों कोर्ट में यदि किसी महिला कोर्ट के माध्यम से भरण पोषण (अलीमनी) की आवश्यकता होती है, तो वह अपने केस के लिए lawyer के माध्यम से एक प्राथमिक प्राथमिकारी पत्र  लिख सकती है। इस पत्र में वह अपने केस की विवरण, विवादित विवाह की तारीख, पति के साथ भरण पोषण की आवश्यकता के कारण और इसके साथ ही आर्थिक दस्तावेज़ भी सम्मिलित कर सकती है, जिनसे उसके आर्थिक स्थिति का प्रमाण हो सके (इस संदर्भ में ज्यादा जानकारी आपको आपके #lawyer अच्छे से दे सकते हैं यह आपके व्यक्तिगत स्थिति पर निर्भर करता है ऐसी स्थिति में आप अपने lawyer को ही hire करे। इस प्राथमिक प्राथमिकारी पत्र के साथ, वह एक अधिकारिक वकील  से सलाह लेने और अपने केस को विचार करने के लिए कोर्ट के समक्ष पेश करने के लिए तैयार हो सकती है। वकील आपको उचित निर्देश देगा और उसके अधिकारों की रक्षा करने में मदद करेगा। कृपया ध्यान दें कि विभिन्न देशों और राज्यों में वैवाहिक कानून अलग-अलग होते हैं और भरण पोषण के मामले भी इसमें विभिन्नता हो सकती है। इसलिए, यह जरूरी ...